✦   Govt. Lab Certified Natural Gemstones  |  Book Your Personalized Kundli Analysis →   ✦

सीप में मोती कैसे बनता है? इसकी वैज्ञानिक और प्राकृतिक प्रक्रिया क्या है?

Vedic Wisdom

मोती कैसे बनता है?

प्राचीन काल में यह माना जाता था कि स्वाति नक्षत्र की बारिश की बूंद जब सीप के खुले मुंह में गिरती है, तो वह मोती बन जाती है। लेकिन आधुनिक विज्ञान के अनुसार, मोती बनना एक जैविक और प्राकृतिक प्रक्रिया है। मोती वास्तव में एक खारे पानी के घोंघे (Mollusk) के शरीर के अंदर बनी झिल्लीदार थैली (Cyst) में विकसित होता है।

जब कोई विजातीय बाहरी पदार्थ, जैसे रेत का छोटा कण या कोई सूक्ष्म कीड़ा, गलती से घोंघे के शरीर के भीतरी संवेदनशील हिस्से में प्रवेश कर जाता है, तो उसे तेज चुभन और पीड़ा होती है। इस बाहरी पदार्थ से बचाव के लिए घोंघा अपने शरीर से एक विशेष पदार्थ स्रावित करना शुरू कर देता है और उस कण पर परत-दर-परत चढ़ाता रहता है।

इस पदार्थ को 'नेकर' (Nacre) या 'मुक्ता-माता' (Mother of Pearl) कहा जाता है। समय के साथ इसकी हजारों सूक्ष्म परतें बाहरी कण के चारों ओर जमा होती जाती हैं और धीरे-धीरे एक ठोस, गोलाकार मोती का रूप ले लेती हैं।

मोती की रासायनिक संरचना

रासायनिक रूप से मोती मुख्यतः 'कोनचायोलिन' (Conchiolin) नामक प्रोटीन के बारीक जालीदार ढांचे और 'ऐरेगोनाइट' (Aragonite) नामक कैल्शियम कार्बोनेट के छोटे-छोटे रवों से मिलकर बना होता है।

यह ध्यान रखना आवश्यक है कि प्राकृतिक मोती मुख्य रूप से खारे पानी की सीपों में बनते हैं। हालांकि, मीठे पानी के मोलस्क भी प्राकृतिक रूप से मोती बना सकते हैं; इसलिए यह कहना सही नहीं है कि केवल समुद्री सीपों में ही प्राकृतिक मोती बनते हैं।

Share this wisdom